जानिये ! अंग्रेजों ने किस सोची समझी साजिश के तहत अश्लीलता को बढ़ावा दिया था । जरूर पढ़ें ? Rajiv Dixit

अंग्रेजों ने हमको चारित्रिक रूप से और नैतिक रूप से गिराने के लिए जो बहुत सारे काम किये, उनमें से एक काम और किया – अश्लीलता को अंग्रेजों ने इस देश में बहुत फैलाया, और बहुत बढ़ावा दिया। हर क्षेत्र में अश्लीलता को उन्होंने फैलाया और बढ़ावा दिया। मां, बहन, बेटियों के शरीर को विद्रूप तरीके से प्रदर्शित करके अंग्रेजों ने इस देश में एक ऐसी परम्परा डाल दी, जो हमारे गले की फाँस बन गयी है, और एक गले की हड्डी जैसी हो गयी है। इस अश्लीलता को अंग्रेजों ने जन्म दिया अपने स्वार्थ के लिए, और उनका स्वार्थ बहुत ही स्पष्ट है, अँगरेज़ चाहते थे कि भारत के लोगों का नैतिक रूप से पतन हो, आध्यात्मिक व चारित्रिक रूप से पतन हो तभी भारतवासी उनके गुलाम रह पायेंगे।

सो, उन्होंने अश्लीलता को बढ़ावा देना शुरू किया, जुआबाज़ी को बढ़ावा देना शुरू किया। जुआ की संस्था इस देश में अंग्रेजों के ज़माने में शुरू हुई, अश्लीलता फैलाने का काम भी अंग्रेजों के ज़माने में शुरू हुआ। अंग्रेजों के ज़माने से बढ़ते- बढ़ते सन 1947 तक एक बड़े पैमाने पर फैला। अब हमारी ऐसी ही कल्पना थी, हमारा ऐसा ही उद्देश्य था कि जब 15 अगस्त 1947 को अँगरेज़ भारत छोड़कर चले गए, तो यह अश्लीलता और जुआबाज़ी का सारा कुचक्र बंद होना चाहिए था, यह ख़त्म होना चाहिए परन्तु आजादी के 62 साल बाद भी यह फैलता ही जा रहा है। यह बंद नहीं हो रहा है, इस पर भी हमें गंभीरता से विचार करना पड़ेगा, और इस पर भी कमर कस कर कोई बड़ा आन्दोलन करना पड़ेगा।

अश्लीलता बहुत तेज़ी से फैल रही है हमारे देश में। आप जानते हैं, इसके लिए सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी अगर किसी की है, तो हिंदुस्तान में बनने वाले सिनेमा की है, फिल्मों की है। फिल्मों ने पिछले पचास सालों में, साठ वर्ष में इतनी तेज़ी से अश्लीलता को फैलाया है, कि दस-बारह-पंद्रह साल के बच्चों तक यह आसानी से पहुँच में आगई है। उसके बाद विदेशी पत्र-पत्रिकाओं ने बहुत तेज़ी से इसको फैलाया है इस देश में, और आगे बढ़ाया है। आपको सुनकर हैरानी होगी, कि भारत देश में 1992 के पहले कोई विदेशी पत्र-पत्रिकाएं नहीं आती थीं। उन पर प्रतिबन्ध लगा हुआ था – सरकार द्वारा कानून बना कर। 1992 में एक नीति बनी सरकार की – ग्लोबलाइज़ेशन, लिबरलायिज़ेशन, प्राइवेटाइजेशन, उदारीकरण, वैश्वीकरण, भूमंडलीकरण। इस नीति में सारे दरवाज़े खोले गए – विदेशी पत्रिकाओं के लिए, विदेशी अखबारों के लिए और विदेशी फिल्मों के लिए। अब, विदेशी फिल्में, विदेशी पत्रिकाएं और विदेशी अखबार आने शुरू हो गए, और उन्होंने इस देश में एक बाढ़ सी ला दी है।

भारत सरकार ने एक इन्टरनेट की दुनिया शुरू की है और इन्टरनेट की दुनिया में, आप जानते हैं, सबसे ज्यादा अगर कुछ देखा और दिखाया जाता है, तो वह सेक्स है, अश्लीलता है, और वल्गैरिटी है। हमारे देश के बच्चों से लेकर 12-15 साल के बच्चों से लेकर – बड़े बुजुर्गों तक जितनी वेबसाइट हमारे देश में खोली जाती हैं – सर्फिंग के लिए, देखने के लिए – उनमें सबसे ज्यादा वेबसाइट खोली जाती हैं, वे सेक्स से सम्बंधित होती हैं, और अश्लीलता से सम्बंधित होती हैं। कंप्यूटर का माउस आप क्लिक करिए, आपकी स्क्रीन पर सैंकड़ों सेक्स की वेबसाइट खुल जाती हैं। और उसमें हमारे छोटे-छोटे बच्चे, नौजवान, पूरी तरह से डूब रहे हैं, उस गर्त में और दलदल में धंसते चले जा रहे हैं। हमारे कोलेजों में पढ़ने वाले लडके, लडकियां, जिनकी उम्र 15से 20 साल से लेकर 20 से 25 साल के बीच में है, इस सेक्स की दुनिया में, अश्लीलता की दुनिया में इतने ज्यादा डूबने लगे हैं, कि वही उनको अभीष्ट लगने लगा है।

और थोड़े दिनों से हमारे देश में जो बहस चली है समलैंगिकता की – कि समलैंगिकता होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए, तो समलैंगिकता के समर्थन में वे सब नौजवान उतर पड़े हैं, जो सेक्स और अश्लीलता की दुनिया में पिछले दस-पंद्रह वर्षों से डूबे हुए हैं। हमारे घर के लिए इतना बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है। हमारे अपने घर के बेटे-बेटियाँ, हमारे अपने घर के भाई-बहन, कब किस ग़लत रास्ते पर चल पड़ें हमें खुद नहीं मालूम होता है। मैं कई बार लोगों के घरों में जाता हूँ, अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों के घरों में जाता हूँ, वे मुझे कहते हैं कि राजीव भाई, हमारे बेटे और बेटी ने जब कंप्यूटर मांगने की जिद की, तो हमको सबसे बड़ा डर यही लगता है मन में, कि पता नहीं यह जो कंप्यूटर हम खरीद कर हम दे रहे हैं, इस कंप्यूटर का हमारे बच्चे सदुपयोग करेंगे, या दुरुपयोग करंगे। क्योंकि कंप्यूटर आते ही इन्टरनेट कनेक्शन आता है, और इन्टरनेट आते ही अश्लीलता पूरे अपने निर्वस्त्र रूप में हिंदुस्तान के नौजवानों के सामने पसर गई होती है।

इस अश्लीलता से भरी हुई पत्रिकाएं, इस अश्लीलता से भरी हुई फिल्में अंधाधुंध भारत में विदेशों से लायी जा रही हैं, आयात की जा रही हैं और इस देश के सिनेमाओं में दिखाई जा रही हैं। बहुत शर्म और अफ़सोस की बात है कि सभी शहरों के सिनेमाघर में सवेरे का एक शो चलता है, 9-10 बजे से लेकर 12 बजे तक, वह ऐसी ही अश्लील फिल्मों का शो होता है जो विदेशों से चोरी-छुपे लायी जाती हैं, और हिंदुस्तान के नौजवानों को दिखाई जाती हैं। और हमारे देश के नौजवान अपना स्कूल छोड़कर, अपना कॉलेज छोड़कर, अपनी कक्षाएं छोड़कर, अपनी पढाई छोड़कर, सबसे ज्यादा फ़िल्में देखने पहुंचते हैं, तो इस सवेरे के शो में ही पहुँचते हैं, जो 10 से 12 बजे तक होता है, जिसमें अश्लील फिल्में दिखाई जाती हैं।

आप सोचिये, हिंदुस्तान नौजवानों का देश है। सारी दुनिया में सबसे अधिक नौजवान अगर कहीं हैं, तो वे इस हिंदुस्तान में ही हैं। भारत की जनसँख्या का कुल आकलन करें, तो 115 करोड़ की हमारी जनसंख्या है, तो इस 115 करोड़ की जनसँख्या लगभग 60 करोड़ हमारे नौजवान हैं। और ये 60 करोड़ नौजवान, अगर अश्लीलता की खाई में इनको धकेल देंगे, इन नौजवानों को अश्लीलता में अगर डुबो देंगे, इन नौजवानों को सेक्स की वल्गैरिटी में अगर आप जाने देंगे, तब तो हिंदुस्तान का भविष्य पूरी तरह से चौपट होने वाला है। इसलिए इस अश्लीलता के खिलाफ भी हमको एक बड़ा अभियान, एक बड़ा संघर्ष चलाना पड़ेगा।

आप बोलेंगे – हम क्या कर सकते हैं? मेरी आपसे एक विनम्र प्रार्थना है, और वह यह कि आपके घर में आपका बेटा या बेटी नौजवान है, आपका छोटा भाई या बहन नौजवान है, और वह इन्टरनेट की दुनिया में रहता है और वह कम्प्यूटर इस्तेमाल करता है तो उसको अपनी आँखों के सामने इस्तेमाल करने के लिए उसको समय दीजिये। उसको अपनी आँखों से ओझल मत होने दीजिये। क्योंकि, आपका दबाव हटते ही पता नहीं कौन सी दुनिया में वह डूब जाए। अपनी आँखों के सामने उसे इन्टरनेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल करने दीजिये और ज्ञान के लिए, ज्ञान की बातों के लिए, ज्ञान के वर्द्घन के लिए कम्प्यूटर इस्तेमाल करने दीजिये, न कि समय बिताने के लिए।

और दूसरा काम – जो नौजवान अश्लीलता में, वल्गैरिटी में डूब गये हैं, उन सबको बाहर निकालने के लिए भी हम सबको कमर कस कर अभियान चलाना पड़ेगा, सबको कमर कसकर काम करना पड़ेगा। और ये काम अगर हम करेंगे तो इसकी शुरूआत कहाँ से होगी – इसकी शुरूआत फिल्मों से करिये। हमारे देश में जो फिल्में हमारी माताओं, बहनों, बेटियों को ग़लत तरीके से चित्रित करती हैं, और अश्लीलता का सबसे ज्यादा दिखावा करती हैं, इन फिल्मों का बहिष्कार करना आप शुरू करिए। क्योंकि बहिष्कार वह हथियार है, यह वह डायनामाइट है जो बड़े से बड़े गुलामी के पहाड़ को तोड़ सकता है। अगर बहिष्कार की ताक़त अपने मन में रखते हैं, और बहिष्कार का जज्बा आप के अन्दर है, तो आप इन फिल्मों का बहिष्कार कर सकते हैं पारिवारिक रूप से, और फिर इन फिल्मों का बहिष्कार कर सकते हैं सामाजिक रूप से, और फिर इन फिल्मों का बहिष्कार कर सकते हैं राष्ट्रीय रूप से। तो ऐसी गलत फिल्में जो माताओं, बहनों को ग़लत तरीके से चित्रित करती हैं, और अश्लीलता फैलाती हैं, सेक्स और वल्गैरिटी में नौजवानों को डुबोती हैं, उनका बहिष्कार कीजिये।

इसी तरह से, जो सीरियल आ रहे हैं हमारे टीवी चैनलों पर, और जिन सीरियलों में सिवाय इस विषय के दूसरा कोई विषय नहीं है, एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर – परस्त्रीगमन, परपुरुषगमन – किसी की पत्नी किसी दूसरी के पति के साथ भाग गयी, किसी का पति किसी दूसरी के पति के साथ भाग गया। एक-दो नहीं, यहाँ बीसियों-बीसियों चैनलों पर यह सीरियल आ रहे हैं जिनमें इस तरह के दृश्य दिखाए जा रहे हैं। उनका भी आप पूरी ताक़त से बहिष्कार करना शुरू करिए। टेलीविज़न का रिमोट कंट्रोल आपके हाथ में है, दबाने की ताक़त पैदा करिए। रिमोट जब आपके हाथ में है, स्विच आपके हाथ में है, तो स्विच ऑफ करना भी आपके हाथ में है। बस आप में संकल्प की ताक़त की ज़रुरत है। तो, अपने संकल्प की ताक़त को बढ़ाइए। अपने परिवार के बेटे-बेटियों के संकल्प की ताक़त को बढ़ाइए। अपने परिवार के भाई-बहनों के संकल्प की ताक़त को बढ़ाइए। और यह रिमोट कण्ट्रोल के स्विच को ऑफ करना सीख लीजिये। और ये फालतू और खराब सीरियल जिस भी चैनल पर आते हैं, सब चैनलों का बहिष्कार करना शुरू कर दीजिये। आपको मालूम है, चैनल चलते हैं विज्ञापनों से, और विज्ञापन मिलते हैं TRP से, और TRP ज्यादा आती है जब ज्यादा से ज्यादा लोग उस चैनल को देखते हैं। अगर ज्यादा से ज्यादा लोग उस चैनल को देखते हैं, तो उस चैनल की TRP बहुत ऊंचे आ जाती है, उसको विज्ञापन अच्छे मिलने शुरू हो जाते हैं, और फिर उस चैनल के विज्ञापनों की संख्या बढ़ने से उस चैनल का ऐसा दुष्कर्म शुरू होता है, कि हर तरह की अश्लीलता, हर तरह की अभद्रता पर उतर आते हैं। तो, ऐसे चैनलों को सबक सिखाने के लिए सबसे आसान तरीका है कि आप बहिष्कार करना शुरू कर दीजिये, चैनलों का स्विच ऑफ करना शुरू कर दीजिये। लगे तो अपने घरों से उन चैनलों को हटाना शुरू कर दीजिये, और अपने घर के बेटे-बेटियों को, उनके चरित्र को, उनके संकल्प को, उनकी नैतिकता को, उनकी ऊंचाई को बचाकर समाज का एक अच्छा व्यक्ति बनाकर समाज को देने की प्रवृत्ति बनाना शुरू कर दीजिये।

तो, अंग्रेजों ने जो हमारे देश में साजिश की हमारे चरित्र का पतन करके, हमारी नैतिकता का पतन करके, हमारी ऊंचाइयों को हमारी नीचाइयों में बदल कर, हमें ऊंचे से नीचा बनाकर, इस अंग्रेजों की की हुई साज़िश को पूरा ख़त्म करने के लिए हम सब को कमर कस कर अभियान चलाना है। जो कुछ अंग्रेजों ने नीतियों के रूप में चलाया, जो कुछ अंग्रेजों ने इस देश में अपने स्वार्थ के लिए बनाया, जो कुछ अंग्रेजों ने इस देश में अपने स्वार्थ को आगे बढाने के लिए स्थापित कराया, वह सब हमें हटाना है, बदलना है, और तभी हम मानेंगे कि भारत में सच्ची आजादी और सच्चा स्वराज आएगा। और भारत में सच्ची स्वतंत्रता भी तभी आएगी जब अंग्रेजों की बनायी गई इन नीतियों का हम पूरी तरह से बहिष्कार कर देंगे, और हमारे देश में अपनी बनायी हुई नीतियां और तंत्र को अपने देश में अपनी ताक़त से लागू करेंगे |

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