फलों की जैली कैसे बनायें

फलों की जैली कैसे बनायें

फलों के पेक्टिन युक्त रस को चीनी तथा खटास (साइट्रिक एसिड) की निश्चित मात्रा के साथ पकाए हुए पदार्थ को जैली कहते हैं I ठण्डा होने पर यह दही की भांति जम जाती है I एक अच्छी जैली में निम्रलिखित गुण होने चाहिए –

यह देखने में पारदर्शक हों, जिस बर्तन में जमायी जाय उसी क आकार ग्रहम कर ले, छूने पर अंगुली पर न चिपकें, रस में स्वाद हो, बोतल उलटने पर जैली बहनी नहीं चाहिए I

जेली के मुख्य घटक

जैली निर्माण के लिए पेक्टिन, अम्ल, शर्करा और जल अनिवार्य है I जब इन चरों का एक निश्चित अनुपात पहुँचता है, तब ही जैली बनती है I यदि कोई भी पदार्थ कम या अधिक हो जाय तो अच्छी जैली नहीं बन पाएगी I यह अनुपात निम्नानुसार है :-

पेक्टिन            –     0.8 से 1 प्रतिशत (औसत – 1.0 प्रतिशत)

खटास (अम्लता)     –     0.75 प्रतिशत (औसत – 1.0 प्रतिशत)

चीनी              –     65 से 68 प्रतिशत (औसत – 67.5 प्रतिशत)

पानी              –     33 से 38 प्रतिशत (औसत – 30.5 प्रतिशत)

जैली गठन की दृढ़ता का कारण अम्लता और शर्करा है I अम्लता को पी.एच. से भी अभिव्यक्त किया जाता है I जैली के लिए उपयुक्त पी.एच. मान 3.2 है, इससे कम होने पर सख्त और अधिक होने पर जमती नहीं है I अच्छी जेली में 67.5 प्रतिशत शर्करा होनी चाहिए, इससे कम होने पर (64.0 प्रतिशत) जेली कमजोर होती है और अधिक होने पर (79.0 प्रतिशत) इसमें क्रिस्टल बन जाते हैं, ऐसा पाया गया है I जेली गठन के स्थायित्व के लिय पेक्टिन चाहिए I पैक्टिन की किस्म के अनुसार यह 0.5 से 1.5 प्रतिशत तक चाहिए, परन्तु 1.0 प्रतिशत पेक्टिन उपयुक्त रहती है I पेक्टिन सबसे महत्वपूर्ण है I यह फल की कोशिकाओं में पाया जाता है I यह प्रायः प्रत्येक फल में पाया जाता है I इसकी मात्रा फल में उसके पकने की अवस्था के अनुसार भिन्न – भिन्न होती है I फल के ठीक अवस्था में पक पक जाने पर इसमें पेक्टिन की अधिकतम मात्रा होती है I कच्चे फलों में यह प्रोटो पेक्टिन के रूप में पायी जाती है I प्रोटो पेक्टिन, पेक्टिन का अघुलनशील पूर्वगामी पदार्थ है I यह जैली बनाने के योग्य नहीं है I फल पकने के दौरान एन्जाइम के द्वारा यह पेक्टिन में रूपान्तरित हो जाता है I आगे और पकने पर पेक्टिन अपघटित होकर मेथिल एल्कोहल और अघुलनशील पेक्टिन अम्ल में भी जैली जमाने की क्षमता नहीं होती I इसलिए कच्चे या अधिक पके फल से बनायी गयी जैली अच्छी तरह जम नहीं पाती है तथा पारदर्शक न बनकर धुंधली बन जाती है I

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