तर मुरब्बा बनाने की प्रकिया

तर मुरब्बा बनाने की प्रकिया के बारे में जाने
  • फल का चुनाव ऐसे फल उपयुक्त होते हैं जो पकते समय गल न जाय अथवा उनका आकर खराब न हो जाय I

आम तौर पर सेब, आँवला, करौंदा, बेल, पपीता, आम, गाजर आदि से तर मुरब्बा बनाया जा सकता है I मुरब्बा बनाने के लिए फल न तो अधिक पक्का और न ही अधिक कच्चा हो I फल सही अवस्था में पका होना चाहिए I पपीता के कच्चे फल से मुरब्बा बनाया जाता है I फल सड़ा, दागी या चोट लगा हुआ नहीं होना चाहिए I जहाँ तक संभव हो ताजे फलों का ही प्रयोग करना चाहिए I

  • फल की तैयारी फल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए I भिन्न – भिन्न फलों को तैयार करने की विधि उनकी रचना के अनुसार होती है I कुछ फलों को बिना छिले ही प्रयोग में लाया जाता है I उदाहरण के लिए – आँवला, खुवानी, बेर, करौंदा, स्ट्राबेरी आदि को नहीं छिला जाता I लेकिन प्रायः सेब, आम, पपीता, नाशपाती, बेल आदि को छीलकर प्रयोग में लाया जाता है I छिलके का हर भाग अच्छी तरह छील लेना चाहिए I छिलने के दौरान फल एन्जाइम की प्रक्रिया से भूरे पड़ने लगते हैं इसलिए इन्हें 2 प्रतिशत नमक के घोल में डालना चाहिए I
  • फल को गोदना फल को मुरब्बा बनाने के लिए गोदना एक महत्वपूर्ण क्रिया है I फल को स्टील के काँटे या बाँस की तीली से गोदना चाहिए I गोदाई गुठली तक हो जानी चाहिए तथा फल इतना भी नहीं गोदना चाहिए कि वह फट जाय I गोदने के बाद फल को 2 प्रतिशत नमक के घोल में डालना आवश्यक है ताकि उसका रंग भूरा नहीं पड़ने पाये I यदि फल ठीक से नहीं गोदा जायेगा तो मुरब्बा उतम किस्म का नहीं हो पायेगा I अच्छी तरह गोदे हुए फल में चीनी का गाढ़ा घोल प्रवेश कर जाता है जिससे फरमेंटेशन नहीं होता I
  • फल को नमक या चुने के पानी में रखना अच्छी तरह गोद लेने के बाद कुछ फलों को नमक या चुने के पानी में रखना पड़ता है I आँवले के कसैलेपन को दूर करने के लिए उसे नमक, फिटकिरी या चुने के घोल में रखा जाता है I इस उपचार से फल का कसैलापन या कड़वापन दूर हो जाता है I इसका रंग भी आकर्षक हो जाता है तथा ये सख्त हो जाते है I
  • फल को पकाना गोदने के बाद फल को पकाकर मुलायम कर लेना चाहिए I विभिन्न फलों को उनके रचना तथा कड़ेपन के अनुसार अलग – अलग समय तक पकाया जाता है I साधारणतया इन्हें 5 – 15 मिनट तक पकाया जाता है I इस उपचार से फल मुलायम हो जाते हैं तथा इनके अन्दर चीनी का घोल आसानी से प्रवेश कर जाता है I पकाने के लिए फलों को मलमल के एक बारीक कपड़े में लेकर उबलते हुए पानी में निर्धारित समय तक रखना चाहिए I इसके परंतु बाद इन्हें बाहर निकालकर इन्हें चीनी मिलाई जाती है I बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग भाप द्वारा की जाती है I
  • चीनी मिलाना फलों को पकाकर मुलायम करने के तुरंत बाद इसमें चीनी मिलाई जाती है I प्रति किलोग्राम फलों के किए डेढ़ किलोग्राम चीनी मिलाई जाती है I चीनी मिलाने की प्रायः 2 विधियाँ है –
  • फलों को चासनी में पकाना

(ब) फलों को चीनी के तहों के बिच रखना

(अ) फलों को चासनी में पकाना इस विधि में फलों को चीनी के 30 – 35 प्रतिशत घोल में पकाते हैं I दुसरे दिन फलों को चासनी से निकालकर उसमे 30 प्रतिशत चीनी और मिलाकर फिर पकाते हैं I तीसरे दिन बची हुई चीनी मिलाकर फलों को चासनी में 30 – 40 मिनट पकाते हैं I फिर फलों को चासनी से निकालकर चासनी को पकाकर इतना गाढ़कर लेते हैं कि इसमें चीनी की मात्रा 70 प्रतिशत हो जाय I चासनी में प्रति किलोग्राम मिलाई गई चीनी पर 2 – 3 ग्राम साइट्रिक एसिड भी मिलाया जाता है ताकि चासनी में चीनी के दाने न पड़ने पाए I इस विधि से मुरब्बा बनाने में फल की प्राकृतिक सुगंध तथा प्रायः खराब हो जाता है I फल के फटने की संभावना रहती है तथा फल का रंग भूरा या काला पड़ जाता है I फल सिकुड़ जाते हैं तथा चासनी में पकाने से विटामिन – सी ह्रास होता है I

(ब) फलों को चीनी के तहों के बिच रखना उबलते पानी के उपचार के तुरंत बाद एक अल्युमिनियम या स्टील के भगोने में चीनी की एक तह बिछानी चाहिए I उसके बाद उसके ऊपर फलों की एक तह लगानी चाहिए I फलों के ऊपर चीनी की एक तह लगानी चाहिए I इस तरह फलों को चीनी के तहों के बीच 24 घंटे के लिए रख देना चाहिए I दुसरे दिन अधिकांश चीनी पिघल जाएगी I अब फलों को बाहर निकालकर चासनी को पका लेना चाहिए I एक उबाल आ जाने पर प्रति किलोग्राम चीनी में 2 – 3 ग्राम साइट्रिक एसिड मिला देना चाहिए I चासनी को छानकर फलों को फिर गरम चासनी में डालकर 24 घंटे के लिए रख देना चाहिए तीसरे दिन फलों को चासनी से निकालकर इतना पकाइए कि चीनी कि मात्रा 70 – 72 प्रतिशत हो जाय I ऐसी अवस्था में फलों को फिर गरम चासनी में डाल देना चाहिए I आठ – दस दिन बाद फलों को चासनी से निकालकर चासनी को पाँच मिनट फिर पका लेना चाहिए क्योंकि इस अवधि में परासरण की क्रिया से चासनी पतली हो जाती है तथा चीनी की मात्रा कम होने की संभावना रहती है I इस विधि से बनाया हुआ मुरब्बा अधिक चमकदार तथा आकर्षक लगता है इसलिए मुरब्बा बनाने की यह सर्योतम विधि है I

(7) जार में भरना जब मुरब्बा ठण्डा हो जाय तो बड़े मुँह के बर्तन में भरना चाहिए I फल चासनी में दुबे रहना चाहिए I जार में ढक्कन लगाकर मोम से सील बंद कर देना चाहिए I

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