अमृत धारा बनाने की विधि

अमृत धारा का नाम आयुर्वेद के इतिहास में बहुत ही गौरव पूर्ण तरीकों से दर्ज किया हुआ हैI अमृत धारा बनाने की विधि बहुत ही आसान है I अमृत-धारा बनाने में उपयोग किये हुए सामानों से ही आप इसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैंI यदि आप अमृत-धारा को बनाकर अपने घर में रख लिए हैं, तो समझ लीजिये की आप ने अपने घर में बिना पैसे के डॉक्टर का अपने घर में बैठा लिया हैI हम सभी के परिवार में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कुछ सामान्य बीमारी से जूझते रहते हैI

अमृत-धारा का उपयोग:-

जैसे :- उल्टी, दस्त, जी मिचलाने, खाँसी, दांत दर्द, जुखाम आदि अमृत-धारा इन सभी बिमारियों में आप की यथा संभव आराम पंहुचने में मदद करता है I

अमृत धारा बनाने की विधि में सबसे प्रचलित विधि को आप के समक्ष रख रहा हूँ, आप इन विधि के द्वारा अपने घर में अमृत-धारा बना सकते है तथा इसकी मार्केटिंग करके पैसे भी कमा सकते हैंI

अमृत धारा की उपयोगिता एवं फायदा  अवर्णीय है आप अमृत धारा को अपने फर्स्टऐड किट में भी शामिल कर सकते है जिससे आप हर समय अमृत धरा का उपयोग कर सकते हैंI

अमृत धारा को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है जिससे आप आसानी से इसे बना सकते है परंतु पुराने अमृत धारा की गुणवत्ता जयादा मानी जाती हैI अजवायन को घर का वैध कहा जाता है क्योकि केवल अजवायन ही अकेले मनुष्य के पेट संबंधित समस्याओं के निदान का शामर्थ रखता है तथा अजवायन के साथ अन्य ओषधि का संयोग अमृत धारा बनकर “सोने पे सुहागा” का कार्य करता हैI

अमृत धारा बनाने की सामग्री:-

  1. पिपरमेंट –  5 ग्राम
  2. कपूर भीमसैनी –  5 ग्राम
  3. अजवायन (थाईमोल) – 5 ग्राम

अमृत धारा बनाने की विधि:-

तीनों को मिलकर काँच की शीशा में बंद कर धूप में रख दें | जब तीनों मिलकर (पानी) बन जाय तब दवा तैयार है |

बताशे में एक बूंद डालकर खाने के उपयोग में ले सकते हैं | दवा देने के 25 मिनट बाद ही थोड़ा – थोड़ा पानी देवें |

आप बहुपयोगी अमृत धारा को उल्टी, दस्त, जी मिचलाने, खाँसी, दांत दर्द, जुखाम आदि में उपयोग कर सकते हैं

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